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सड़क या हादसों का सफर कोर कॉलेज से कलियर तक का मार्ग गड्ढों में तब्दील,राहगीर परेशान,क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सोए कुमकरण की नींद।
ब्यूरो रिपोर्ट:24 पब्लिक न्यूज़।
कलियर।कोर कॉलेज से रहमतपुर होते हुए पिरान कलियर को जोड़ने वाली मुख्य सड़क हुई गड्ढों में तपदील।पिरान कलियर विधानसभा क्षेत्र का रहमतपुर मार्ग अपनी बदहाली पर आंसू बाह रहा है।और ऐसा नहीं है कि इस मार्ग से कोई क्षेत्रय जनप्रतिनिधि ना गुजरता हो आए दिन इसी रास्ते से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि का आवागमन रहता है।लेकिन ये सड़क कम गड्ढे ज्यादा वाली सड़क पर शायद उनकी नजर ना जाती हो या यह कहे देखकर ही अनदेखा किया जा रहा हो।यूपी की सड़को के लिए एक डायलॉग कुछ साल पहले वायरल हुआ था जिसमें एक महिला कहती है कि यहां सड़कों में गड्ढे नहीं है गड्ढों में सड़क है वह कहावत अब उत्तराखंड के रहमतपुर मार्ग पर सटीक बैठ रही है।आपको बता दे कि लगभग चार किलोमीटर के मार्ग में सैकड़ो खतरनाक गड्ढे हो गए हैं जिसमें कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।इस मार्ग पर लगभग दो-तीन महीने पहले इन गड्ढों को भरा गया था लेकिन किसी जनप्रतिनिधि के संज्ञान न लेने की वजह से उसमें घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया जो हफ्ते भर में ही टूट कर खस्ता हाल हो गई थी और ठेकेदार द्वारा किया गया भ्रष्टाचार भी उजागर हो गया था।यही सड़क कभी सुगम सफर का जरिया रही यह सड़क अब पूरी तरह से गड्ढों के तालाब में तब्दील हो चुकी है।सड़क की खस्ताहाल स्थिति के कारण यहां से गुजरने वाले हजारों स्थानीय निवासियों, कॉलेज के छात्रों और कलियर दरगाह आने वाले जायरीन को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहे है।हादसों को दावत देते गहरे गड्ढे सड़क पर एक-दो नहीं, बल्कि हर कुछ मीटर पर जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं।दोपहिया वाहन चालक आए दिन संतुलन खोकर गिर रहे हैं जिससे लोग चोटिल हो रहे हैं।जलभराव से बढ़ी मुसीबत मामूली बारिश होते ही इन गड्ढों में पानी भर जाता है। पानी भरे होने के कारण वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे रात के समय दुर्घटना का खतरा दोगुना हो जाता है।इस मार्ग पर हिचकोले खाते वाहनों के कारण न सिर्फ गाड़ियों के सस्पेंशन खराब हो रहे हैं।वही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।यह सड़क लंबे समय से टूटी हुई है, लेकिन संबंधित विभाग गहरी नींद में सोया है। कॉलेज के छात्रों से लेकर मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस तक, सब इस रास्ते पर रेंगने को मजबूर हैं।
