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जमीयत के कार्यक्रम में भाईचारे प्यार मोहब्बत एकता का दिया संदेश,देश की आजादी में मदरसों के उलमाओं ने फांसी के फंदे को गले लगाया लेकिन अंग्रेजों के साथ समझौता नहीं किया,यह किरदार है मुसलमानो का,मदनी।
ब्यूरो रिपोर्ट:24 पब्लिक न्यूज़।
कलियर।मंगलवार को पिरान कलियर समीम साबरी कॉलोनी में जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की प्रदेश कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिसमें हजारों की तादाद में उलेमाओं के साथ-साथ क्षेत्रीय जनता ने भी हिस्सा लिया वही मदनी को सुनने के लिए लोगों का उमड़ा हुजूम और जहां-तहां लोग खड़े होकर मदनी की नसीहत को सुनते नजर आए।इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद अरशद मदनी ने शिरकत की देश में प्यार,मोहब्बत,भाईचारा और एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद का इतिहास गवाह है कि उसके उलमाओं ने मजहब को आजादी की राह में रोड़ा नहीं, बल्कि अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ एक मजबूत ढाल बनाया।उन्होंने एक ऐसे आजाद भारत का सपना देखा था जहां हर नागरिक चाहे वह किसी भी धर्म का हो बराबरी और सम्मान के साथ रह सके। देश की आजादी में उनका यह अनमोल योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।मौलाना सय्यद अरशद मदनी ने कहा कि माल्टा की जेल से लेकर काले पानी तक हमारे बुजुर्गों ने जेल कटी है इस वतन के लिए लेकिन अंग्रेजों के सामने नहीं झुके हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगाया लेकिन वतन के साथ गद्दारी नहीं कि यह किरदार है देश की आजादी में मुसलमानो का,दिल्ली का ऐसा कोई पेड़ या सड़क नहीं बची थी जहां मस्जिद मदरसों के उलेमाओं की लाशें ना लटकी हो अपना सर कटवाना गवारा समझा लेकिन अंग्रेजों के सामने झुके नहीं और अपने वतन को आजाद करने तक अंग्रेजों के साथ लड़ते रहे इन्हीं मस्जिद मदरसों के उलेमाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ पतवा जारी किया था यह इतिहास है मुसलमान का,जिसे दबाया जा रहा है और मुसलमान के खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है इस देश को आजाद करने में इन्हीं मस्जिद मदरसों के उलेमाओं ने अहम रोल निभाया जिन्हें आज आवेध बाताकर बुलडोज किया जा रहा है।मौलाना सय्यद अरशद मदनी ने कहा कि एक हिन्दू शख्स मेरे पास आया और मुझसे कहा मेरी बेटी दुबई में फंसी हुई है मैने उन्हें कहा वो आपकी बेटी नहीं मेरी बहन है जमीयत के प्लेट फार्म से आपकी बेटी को लाने में जितना पैसा लगेगा हम खर्च करके उन्हें वापस लाएंगे।ये मुसलमान का किरदार है जिनकी मस्जिदों को बुलडोज किया जा रहा है।दिल्ली में आग लगी उसमें भी मुसलमानों ने अपना सबकुछ बिछाकर उन लोगों की जान बचाई जो लोग वहां फंसे थे ये किरदार है मुसलमान का।जाती धर्म ना देखते हुए जमीयत उलेमा उत्तराखंड ने पिछले वर्षों में केवल धार्मिक गतिविधियों तक अपने कार्यों को सीमित नहीं रखा, बल्कि शिक्षा,समाज सुधार, आपदा राहत, कानूनी सहायता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।उन्होंने बताया कि प्रदेश भर में जमीयत उलेमा द्वारा गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता,निर्धन छात्रों को शैक्षिक सहयोग,चिकित्सा सहायता तथा विभिन्न सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए गए।संगठन ने विशेष रूप से युवाओं में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, स्कूल और मदरसा शिक्षा को प्रोत्साहित करने तथा समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाने पर विशेष बल दिया।प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित सभाओं,सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से नशाखोरी,दहेज प्रथा,फिजूलखचवीं, पारिवारिक विघटन,अशिक्षा और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध लोगों को जागरूक किया गया।देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में विगत वर्श आई प्राकृतिक आपदाओं का विशेष उल्लेख किया गया है। बताया गया कि भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी परिस्थितियों के दौरान जमीयत उलेमा उत्तराखंड के कार्यकर्ताओं ने प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री,राशन,कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाई चार गरीब लोगों को मकान बनाने में मदद की।एमडीडीए कालोनी और सहस्त्रधारा में कई दिनों तक प्रभावित परिवारों को भोजन मुहय्या कराया कई स्थानों पर स्वयंसेवकों ने प्रशासन के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में भी सहयोग किया।पंजाब में बाढ़ ग्रसित लोगों की जमीयत के एलान पर मुसलमानों ने सैकड़ो ट्रक राशन सामग्री ओर जरूरत के सामान की लाइन लगा दी तथा पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए 18 लाख का आर्थिक सहयोग मुहैया,ये मुसलमान का किरदार है जिनके मदरसों को बुलडोज किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि हमारे नबी ने कहा कि अपने पड़ोसी के साथ अच्छा सलूक करो चाहे वो हिन्दू हो या सिख हो या ईसाई हो या किसी भी मजहब का अगर उसका पड़ोसी नाराज है तो वो कभी अच्छा आदमी नहीं होसकता यह सिखाता है मजहबे इस्लाम,मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि आपस में भाईचारा कायम रखो तभी देश सुरक्षित रह सकता है अगर भाईचारा खत्म हो गया तो फिर यह देश सुरक्षित नहीं है।सभी नौजवान बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूरी बनाए रखने की अपील के साथ-साथ दुनियावी वह दीन की शिक्षा पर भी जोर दिया।और उन्होंने कहा कि एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहाँ हर नागरिक बिना किसी भेदभाव के बराबरी और सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर सके।यह बैठक न केवल जमीयत के सांगठन के मजबूती का प्रतीक बनी,बल्कि कठिन समय में देश में सौहार्द और आपसी भाईचारे को बनाए रखने के लिए एक वैचारिक प्रेरणा के रूप में भी देखी जा रही है।
