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कलियर में शीरमाल का ठेका बना चर्चा का विषय,यह सामान जिस कच्चे माल से बनता है उस पर जीएसटी लगता है उसके बाद भी उसे बेचने की आजादी नही।
ब्यूरो रिपोर्ट: 24 पब्लिक न्यूज़।
कलियर।पिरान कलियर क्षेत्र में बिकने वाले सोहन हलवा,हलवा पराठा,इलायची दाने का ठेका दरगाह प्रबंधनतंत्र द्वारा लाखो रुपये में दिया जाता है।और अब एक और नया ठेका शुरू किया जा रहा है जिसमें शीरमाल बेचने का ठेका भी लाखों रुपए में दिया जा रहा है यह सभी ठेके होने के बाद इनका बोझ जायरीनो के ऊपर पड़ना तय है क्योंकि ठेकेदार ठेकी की रकम पूरी करने के लिए जायरीनो से ही पैसे वसूल करेगा चाहे वह रेट बढ़ाकर करें या फिर शीरमाल की क्वालिटी घटाकर।वही देश के कोने कोने से आने वाले कुछ जायरीन अपना जेब खर्च बचाने के लिए रोटी की जगह चाय पानी के साथ शीरमाल खाकर ही अपना और अपने बच्चों का पेट भर लेते हैं क्योंकि अगर जायरीन होटल से खाना खाएंगे तो वह काफी महंगा पड़ता है इसलिए शीरमाल से ही काम चला लेते हैं।सूत्रों का कहना है की उच्च अधिकारी अपनी जेब भरने के लिए यह ठेके दे रहे हैं क्योंकि ठेकेदारों पर वर्षों से दरगाह का लाखों रुपया बकाया है जिसे दरगाह प्रबंधन तंत्र वसूल करने में नाकाम साबित हो रहा है।अब सवाल यह उठता है कि ये सभी खाद्यय सामग्री बनाने का लाइसेंस एफएसएसआई देता है बेचने का रजिस्ट्रेशन आयकर विभाग जीएसटी के अधीन आता है।ओर जब यह सभी लाइसेंस सरकार के द्वारा जारी किए जाते है तो फिर ठेका क्यू।वही सूत्रो का कहना है कि इन सभी का ठेका होने के बाद ठेकेदार के अलावा कोई भी दुकानदार सोहन हलवा,इलायची दाना,शीरमाल आदि दरगाह बाजार में नहीं बेच सकता तो क्या ठेकेदार को आयकर विभाग से भी बड़ी पावर मिलजाती है।जब आयकर विभाग के अधीन आने वाली खरीद फरोख्त को विभागय अधिकारी छोटे-छोटे दुकानदारों को नहीं रोकते तो आखिर ठेकेदार को ये कोनसी पावर मिलती है जो उसके अलावा ओर कोई यह सामान नहीं बेचस्कता।आपको बता दे कि यह खाद्य सामग्री बनाने के लिए चीनी,बेसन,मैदा,घी,सूजी,आदि माल बिल होकर आता है जिस पर जीएसटी लगा होता है जो सेंटर ओर राज्य सरकार के पास जाता है उसके बाउजूद भी उस कच्चे सामान से तैयार हुआ सोहन हलवा,इलायची दाना शीरमाल को दरगाह क्षेत्र हर कोई दुकानदार नही बेच सकते आखिर ये कैसा कानून है।
